रिपोर्ट इंद्रजीत बनर्जी
आसमान की जद में रहना ए परिंदों, क्योंकि ये बाजों का इलाका है… इनकी परवाज में जुनून है, कोई महज कहानी नहीं है!’ उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की धरती पर बुधवार दोपहर यही एहसास सच बनकर उतर आया. दोपहर 2 बजे जैसे ही आसमान में गड़गड़ाहट गूंजी, लोगों ने समझ लिया कि यह कोई सामान्य दिन नहीं है. यह भारतीय वायुसेना का दिन था. शौर्य का दिन, संदेश का दिन और भरोसे का दिन.
इसको लेकर मंगलवार को ही फाइटर जेट और सैन्य विमान सुलतानपुर पहुंच चुके थे. लेकिन बुधवार को जब घड़ी ने दो बजाए, तब आसमान की चुप्पी टूट गई. एक-एक कर जब लड़ाकू विमानों ने एक्सप्रेस-वे की 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप को छुआ, तो ऐसा लगा मानो सड़क नहीं, रणभूमि तैयार हो गई हो. सुखोई, जगुआर, मिराज, तेजस और एमआई-17 वी-5 की गूंज ने पूरे इलाके को रोमांच और गर्व से भर दिया.

यह महज एक एयर शो नहीं था. यह भारतीय वायुसेना की उस क्षमता का प्रदर्शन था, जो बताती है कि जरूरत पड़ने पर हमारी सड़कें भी रनवे बन सकती हैं और हर दिशा से जवाब दिया जा सकता है.पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा केवल सड़क नहीं रहा. यह भारतीय वायुसेना की अजेय शक्ति का जीवंत प्रमाण बन गया. दोपहर 2 बजे के बाद जैसे ही लड़ाकू विमानों ने टचडाउन शुरू किया, हवा का सीना चीरती हुई आवाजें दूर-दूर तक सुनाई देने लगीं. जब सुखोई-30 एमकेआई नीचे आया, जब जगुआर की रफ्तार ने रडार को चकमा दिया और जब स्वदेशी तेजस की हुंकार गूंजी, तब पूरा पूर्वांचल गवाह बना कि वायुसेना को दुनिया का ‘अभिजेय कवच’ क्यों कहा जाता है. यह अभ्यास केवल अभ्यास नहीं था, यह संदेश था- अगर युद्ध हुआ तो एयरबेस के बिना भी लड़ाई जारी रहेगी. हाईवे पर बनी यह एयरस्ट्रिप युद्ध के समय बैकअप रनवे का काम करती है. 320 मिलीमीटर मोटी कंक्रीट की यह सतह भारी लड़ाकू विमानों का भार सहन करने में सक्षम है. इसी वजह से यह एयरस्ट्रिप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.
