ब्यूरो रिपोर्ट
फर्रुखाबाद/कायमगंज /लालबाग़ हमीरपुर खास स्थित दरगाह हज़रत बाबा जूही शाह रहमतुल्लाह अलैह के आस्ताने पर पहले खलीफा मुर्शिदी व मौलाई सरकार सैय्यदना शेख हज़रत मुनीर अहमद शाह रहमतुल्लाह अलैह(उस्ताद साहब) की सालाना नज़र व मीलाद मुस्तफा का एहतिमाम किया गया सरकार –ए–दो आलम सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम की शान बयान करने के बाद मुफ्ती मुनीर अहमद साहब क़िब्ला ने हज़रत मुनीर अहमद शाह की शान बयान की वही दरगाह जानशीन व खलीफा सूफी हज़रत मुशीर अहमद क़ादरी चिश्ती वारसी ने हज़रत मुनीर अहमद शाह जो कि हज़रत के दादा हुज़ूर भी हैं ने कहा कि हज़रत मुनीर अहमद शाह अपने दौर में उर्दू अदब के बेहतरीन उस्ताद थे आप उर्दू के अलावा हिंदी इंग्लिश और अरबी में भी माहिर थे आप तलवार भाला बरछी के भी माहिर थे आप का अखाड़ा भी था जिसमें आप लोगों को सिखाया करते थे फज्र के बाद अखाड़ा फिर मोहल्ले के बच्चों को उर्दू अरबी हिंदी इंग्लिश की तालीम देते थे उसके और उसके बाद अपने बच्चों की परवरिश के लिए अपनी दुकान पर काम करते थे कायमगंज के सभी लोग जानते है कि आप स्टोव टॉर्च लालटेन हांडा वगैरह का काम भी करते थे साथ लोगो को रोजगार भी दिया करते थे आपके यह शादी (विवाह ) में लालटेन हांडा वगैरह किराए पर दिया करते थे मगरिब से पहले अपने पीरो मुर्शीद की खिदमत में पहुंच जाया करते थे और कुछ पैसा अपने पीर की खिदमत में पेश करने के बाद ईशा से पहले घर पहुंच जाया करते थे आपने अपने बच्चों को अच्छी तालीम के साथ अच्छी तरबियत से भी नवाजा था आप हमेशा लोगो के दुख दर्द में शरीक रहते हमेशा लोगो की मदद इस तरह करते कि खुद उनके बच्चों को भी नहीं पता था यही वजह रही कि इतने मालदार होने के बावजूद भी आपने अपने बच्चों की परवरिश गरीबी जैसे माहौल बनाकर की कभी पैसे को जोड़ा नहीं कभी कल की फिक्र नहीं की और इबादत का आलम ये था और उनके दौर बच्चे जो आज बूढ़े हो गए है बताते है कि हमने कभी उनको हंसते नहीं देखा और वो लोग पूछते कि उस्ताद साहब ये कौनसे वक्त की नमाज़ है आप फ़र्ज़ नमाजों के बाद नफ़ली इबादत इतनी करते थे कि आपकी सांस फूल जाती थी और कभी कभी जानमाज पर ही सो जाते थे कितनी भी सांस फूलती हो कितनी भी रात क्यों न हो गई हो अगर कही मीलाद शरीफ की महफिल सजी हो आप वहां ज़रूर जाते और जिक्र–ए–मुस्तफा करते। आपकी पूरी जिंदगी अल्लाह ताला की इबादत में गुजरी यहां तक कि जब आपका आखिरी वक्त आया आप उस वक्त भी नमाज़ में थे फारिग होने के बाद आपने लोगो से कुछ कलाम किया और मालिक हकीकी से जा मिले आज हम उन्हीं उस्ताद साहब का सालाना उर्स मना रहे है अल्लाह हम सबको बुजुर्गों के नक्शे कदम पर चलने की तौफीक अता फरमाए अल्लाह हम सब में आपस में मोहब्बत कायम फरमाए हमारे मुल्क हिंदुस्तान में अमन चैन शांति अता फरमाए मुल्क की तरक्की अता फरमाए हमारे बच्चों को नेक राह व कामयाबी आता फरमाए दुआ के बाद लंगर आम किया गया इस मौके पर आकिल खान साहब,मुफ्ती मुनीर,मौलाना इमामुद्दीन व दीगर उलमाये किराम ने बयान किया इस मौके पर जमीर अहमद,तौहीद अहमद,तमहीद अहमद,बबलू भाई,सज्जाद खान,खलील खान,पप्पू भाई,रावेज़ खान बंटी भाई,अमरेश गंगवार,मुन्ना राजपूत,आमिर हुसैन,हनीफ भाई,मुकीम जूही,सनी बॉथम,डॉ अरशद मंसूरी,पवन बॉथम,गजनफर खान,हाफिज आजम खान,लाइक सिद्दीकी,बबलू सिद्दीकी,नोमान सिद्दीकी,अफजल,संजय शर्मा,राजू गुप्ता, करण भारद्वाज,वरिष्ठ पत्रकार सैयद जमाल अली,अब्दुल रहमान,आसिफ आसिफ मंसूरी,अरविंद यादव,एड राहुल सागर,पप्पन सिद्दीकी,सलीम खान,एड अदीब खान,नावेद खान,आदि शामिल रहे
