रिपोर्ट: सलमान डंगे, रायबाग
कर्नाटक के रायबाग तालुका के खेमलापुर गांव में श्रावण मास के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय श्री अरण्यसिद्धेश्वर यात्रा महोत्सव का भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन ढोल-नगाड़ों और वाद्यवृंदों की मंगलध्वनि के बीच श्री अरण्यसिद्धेश्वर की पालकी, घोड़ों और श्री यल्लम्मादेवी की जगमूर्तियों की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा कृष्णा नदी तक पहुंची, जहां देवमूर्तियों का पवित्र स्नान कराया गया। इसके बाद कुंभ लेकर चल रहीं सुहागिन महिलाओं ने आरती की और भक्तिभाव के साथ देवमूर्तियों को वापस मंदिर लाया गया।
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने पालकी और देवता के घोड़े पर नारियल, खारिक और भंडारा अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। भंडारा उड़ाते हजारों श्रद्धालुओं का दृश्य यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा।
पांच दिनों तक उपवास और व्रत रखने वाले पुजारियों ने पालकी उत्सव के दौरान अपनी विशेष धार्मिक परंपरा के तहत पीठ पर सीसे की गोलियां लगवाकर मन्नत और भक्ति अर्पित की।
देवमूर्तियों के मंदिर में प्रवेश के बाद पारंपरिक रूप से हुग्गी का नैवेद्य चढ़ाया गया। इसके बाद हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाअन्नसंतर्पण और महाप्रसाद का आयोजन किया गया।
यात्रा की सफलता में स्वच्छता विकास खेमलापुर युवा टीम के 30 सदस्यों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युवाओं ने पांच दिनों तक स्वच्छता, सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में सेवा दी, जिसकी श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने सराहना की।
कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष श्रीधर मूडलगी सहित मंदिर प्रबंधन समिति के पदाधिकारी, गणमान्य लोग और आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।
