सड़क-नाली-खरंजा की मांग को लेकर आंदोलन, ग्रामीणों का आरोप—कच्ची गलियों में गिरकर कई लोग घायल, जलभराव में बच्चे की मौत के बाद भी जिम्मेदार बेखबर
फिरोजाबाद में एक तरफ देश आजादी का जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर के वार्ड नंबर-1 स्थित रविदास नगर के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए धरने पर बैठे हैं। सड़क, नाली और जल निकासी की मांग को लेकर लोग पिछले चार दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। धरना स्थल पर पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं सामाजिक कार्यकर्ता सतेन्द्र जैन सौली ने आंदोलनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल खड़े किए।
मामला फिरोजाबाद के वार्ड नंबर-1 स्थित संत रविदास नगर का है, जहां सड़क, नाली और खरंजा जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर स्थानीय लोग 12 अगस्त से धरने पर बैठे हैं।
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि कई गलियों में लंबे समय से सड़क और जल निकासी के लिए नाली की मांग की जा रही थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, 3 अगस्त को नगर आयुक्त को ज्ञापन दिया गया था और 10 अगस्त तक काम शुरू कराने का आश्वासन मिला था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कच्ची और मिट्टी की गलियों के कारण अब तक आधा दर्जन से अधिक लोग फिसलकर घायल हो चुके हैं। वहीं जल निकासी की समस्या के चलते करीब दो महीने पहले एक बच्चे की पानी में डूबने से मौत होने का भी दावा किया गया है।
धरने की जानकारी मिलने पर सपा के राष्ट्रीय सचिव एवं सामाजिक कार्यकर्ता सतेन्द्र जैन सौली मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान सपा नेता सत्यम त्रिपुरारी, मयंक यादव और हरिओम यादव भी मौजूद रहे।
सतेन्द्र जैन सौली:
सौली भईया ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों और अधिकारियों के पास चार दिनों से धरने पर बैठे फरियादियों की बात सुनने तक का समय नहीं है, तो जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। उन्होंने कहा कि फिरोजाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने की बात की जा रही है, जबकि शहर का बड़ा हिस्सा आज भी सड़क, नाली और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।
उन्होंने नगर निगम के बजट को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये का सालाना बजट होने के बावजूद जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है।
फिलहाल रविदास नगर के लोगों ने अपनी मांगों को लेकर धरना जारी रखा है। अब देखना होगा कि नगर निगम और जिम्मेदार अधिकारी आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान कब तक करते हैं।
