उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्या गीता रानी विश्वकर्मा आज प्रयागराज में महिला आरक्षण बिल एवं अन्य मुद्दों पर जमकर बरसी। अपने दो दिवसीय प्रयागराज प्रवास के दौरान वह उन्होंने प्रयागराज में महिला आरक्षण से संबंधित सरकार की चलाई जा रही महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम में शिरकत करने आई थी। इस दौरान खास बातचीत में उन्होंने महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया की जब देश की पहली महिला प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने स्वयं भी महिलाओं के अधिकारों के विषय में गहन चिंतन किया था और उन्होंने इस बात का जिक्र भी किया था कि आगे चलकर राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं का अहम योगदान होगा तब भी उन्होंने कभी भी महिलाओं के लिए संसद से लेकर नगर निगम के चुनाव तक किसी भी जगह पर महिलाओं के लिए कोई आरक्षण या स्थाई सीटों की मांग के विषय में कोई बिल प्रस्तुत नहीं किया था आज हमारे देश में 30 सालों के बाद महिला आरक्षण बिल के माध्यम से देश की राजनीति में महिलाओं को 33% का आरक्षण दिया जा रहा है जो अपने आप में काफी है लेकिन आगे आने वाले समय में यह प्रतिशत 33 से बड़ा कर 40% तक कर दिया जाना चाहिए ताकि अगर महिलाओं को देश की आधी आबादी कहीं जा रही है तो कम से कम 40% की राजनीति में हिस्सेदारी होना जरूरी है ताकि महिलाओं के अधिकारों और उनके विकास के लिए की जाने वाली कार्यों को सुनिश्चित और व्यवस्थित तरीके से कराया जा सके इस पर संसद से लेकर देश के किसी भी सदन चाहे वह नगर पालिका हो या पंचायत हो या फिर विधानसभा या सांसद हर जगह पर गहन विचार विमर्श हो सके देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात का चिंतन करते हुए महिलाओं के अधिकारों के विषय में जाना और आज हमें 33% की राजनीतिक अधिकारों में अपनी भागीदारी देने का अवसर मिला है जिसके लिए उनको धन्यवाद है। साथी उन्होंने यह मांग भी रखी कि महिला आरक्षण बिल को आगामी 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव के मध्य नजर तुरंत लागू कर देना चाहिए और 2027 चुनाव में उत्तर प्रदेश में महिलाओं को 33% सीटों का आरक्षण भी कर देना चाहिए ताकि सभी पार्टियों के बीच एक उदाहरण स्थिर हो जाए और सभी पार्टियों जैसे एकमत होकर इस बिल को पास की है वैसे ही 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में 33% महिलाएं अपना राजनीतिक दबदबा दिखा सके।
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उन्होंने आगे भी कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे बर्बरता पूर्ण कार्यों को देखते हुए काफी चिंतन और दर्द हो रहा है जहां पर अंबेडकर नगर से लेकर नोएडा तक महिलाओं के साथ पुरुष पुलिस कर्मियों द्वारा जिस प्रकार से बर्बरता पूर्वक मारपीट कर रहे हैं यह कदापि बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और जल्द ही राज्य महिला आयोग इस पूरे विषय में डीजीपी उत्तर प्रदेश को खत लिखकर इन पूरे मामलों में शामिल पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेगी आज महिलाओं के कानूनी अधिकारों से संबंधित कई ऐसे मामले हैं जिनको उत्तर प्रदेश के डीजीपी के आदेश के बाद पुलिस द्वारा थानों में ना तो मुकदमे लिखा जा रहे हैं और ना ही महिलाओं को मदद मिल पा रही है ऐसे सभी मामलों में कार्रवाई करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग पूरी तरीके से तत्पर है और ऐसे मामलों का संज्ञान लेते हुए पहले मामले की सत्यता की जांच करने के बाद ही उनके खिलाफ सरकार से अपील करते हुए महिलाओं की सहायता हेतु कानूनी कार्यवाही करने की व्यवस्था करने का काम किया जाएगा साथ ही ऐसे मामले जहां पर महिलाएं अपने अधिकारों को गलत तरीके से उपयोग करने की कोशिश कर रही है कि भी जांच करने का काम उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग करेगी और अपने अधिकारों का गलत उपयोग करने वाले ऐसी महिलाओं को भी सजा दिलाने का काम किया जाएगा ताकि इन लोगों के कारण वह महिलाएं जिनको सच में हमारी आवश्यकता है और जिनको कानूनी सहायता की जरूरत है को उचित तरीके से मदद मिलती रहे और न्याय सभी को समुचित और सही तरीके से मिल सके।